आने वाले जन्म मेँ कौनसा “शरीर” लेना पसंद करोगे?

“प्रशमरति” सूत्र से :-

“एकस्य जन्ममरणे गतयश्च शुभाशुभा भवावर्ते
तस्मादाकालिकहितमेकेनैवात्मन:कार्यं ||१५३||”

और

“सम्यक्दर्शनज्ञानचरित्राणि मोक्ष मार्ग:”

जैसे सूत्र को देने वाले श्री उमास्वतीजी महाराज को कोटि कोटि वंदना.

(“शुद्ध और शुभ” भाव से हम “करोड़ वंदन” दो सेकंड में कर सकते हैं, ये है मन की शक्ति –

इसलिए मन में कभी ये विचार ना करें कि हमारा “मन” बहुत “कमजोर” है).

 

जैन धर्म के महान शासन प्रभावक श्री उमास्वतीजी महाराज के उपरोक्त सूत्र मेँ  मानो  पूरी जैन-फिलोसोफी समा गयी है.

“दर्शन हो तो सच्चे का,
ज्ञान हो तो सच्चे का,
आचरण हो तो सच्चे का.”

सीधे शब्दों मेँ इस सूत्र का ये अर्थ है.

बस अब प्रश्न रह जाता है कि सच्चा क्या है?

आत्मा

यही अनंत काल  से विभिन्न रूप धारण कर रहा है…..
कभी पेड़ के रूप मेँ,
कभी पानी के रूप मेँ,
कभी हवा के रूप मेँ,
कभी पहाड़ के रूप मेँ

 

कभी बिल्ली,शेर या गधे के रूप मेँ!
कभी ब्राह्मण, कभी क्षत्रिय और कभी मुल्ला भी!

कौनसा “अवतार” इस “आत्मा” ने नहीं लिया!

जो “बगीचे” मेँ जाना बहुत पसंद करते हैं और
आज जिस तरीके से “फूल” तोड़ रहे हैं,
उन्हें “फूल” बनने कि तैयारी रखनी होगी
ताकि “जो फूल उस समय था,”
वो “तुम्हें” तोड़ सकेगा – अपनी “ख़ुशी” के लिए या “बदला” लेने के लिए!

जिन्हें “तैरना” बहुत पसंद है, तो खुद को कभी “पानी” के जीव बनने की तैयारी रखें.
(भगवान महावीर स्वामी की देशना में एक “मेंढक” का उदाहरण आता है जो पानी मेँ रहने वाला जीव इसलिए बना क्योंकि पूर्व जन्म मेँ उसी ने “बावड़ी” (Water Park) बनवायी थी और “मैंने” इतनी सुन्दर बावड़ी बनवायी, इसका अभिमान था. अगले जन्म मेँ उसी बावड़ी मेँ रहने वाला मेंढक बना ताकि जीवन भर Water Park का मजा ले सके).

 

जिन्हें “ठंडी हवा” बहुत पसंद है, वो अपने लिए “वायु” के “जीव” बनने का रास्ता पसंद कर रहें है.
फिर “वायु” के उस जन्म मेँ जहाँ चाहें, वहां घूमा  करेंगे.

ये पढ़ने के बाद “ठंडी हवा” के झोंके जरूर आ रहे होंगे.

जिन्हें “हिल स्टेशन” बहुत पसंद है, वो “पृथ्वीकाय” बनने की तैयारी रखें.
(यदि ये बात अभी ही आपको हिला दे (कम्पन कर दे) तो ज्यादा अच्छा है).

उपरोक्त श्लोक मेँ श्री उमास्वतीजी महाराज ने जो कहा है उसका अर्थ ये है:
जन्म, जरा(रोग) और मरण से सभी जीव “भयभीत” रहते हैं, क्योंकि हर जगह उसे “अकेला” ही जाना पड़ता है.

फोटो:

ये हमारे आने वाले जन्म का हो सकता है

यदि बड़े होने के बाद भी हमें

नदी, वाटर पार्क, सी-व्यू, डैम इत्यादि देखना अच्छा लगता है.