रहस्यमयी “नवकार” और सुंदरता जैन धर्म की

navkar

जैन धर्म के साधू, उपाध्याय, आचार्य (गच्छाधिपति और श्रुत केवली भी इसमें शामिल हैं)
सभी महामंत्र  नवकार का स्मरण, चिंतन, मनन और ध्यान करते हैं.

“नवकार” के कारण ही सभी जैनी एक सूत्र में बंधे हुवे हैं.

“नमो लोए सव्वसाहूणं”
सभी कहते हैं.

कोई ये नहीं कहता –
“नमो लोए “तप्पागच्छीय साहूणं या
नमो लोए “खरतरगच्छीय साहूणं.”

अब यदि कोई साधू किसी अन्य सम्प्रदाय के साधुओं को नमस्कार नहीं करें
तो वो नवकार “अधूरा” गिनते हैं.
इसीलिए “नवकार मंत्र” वर्षों से जप करते हुए भी सिद्ध नहीं हो पाता.
(श्रावकों को भी सभी साधुओं को गोचरी, पानी, वैयावच्च इत्यादि का “लाभ” लेना चाहिए

 

अन्यथा उनके द्वारा गिना हुआ नवकार भी “अधूरा” हैं चाहे ९-९ लाख के “घोटे” लगा लिए हों).

१. हर साधू नमस्कार करता है हर उपाध्याय और आचार्य को. सभी साधुओं को भी! 

२. हर उपाध्याय नमस्कार करता है हर आचार्य को और सभी उपाध्यायों और साधुओं को भी!
३. हर आचार्य नमस्कार करता है सभी उपाध्यायों और साधुओं को भी!

आप सोच रहे होंगे कि ये सब क्या माजरा है – कि एक “बड़ा” छोटों को नमस्कार करे!

वास्तव में ये सब नमस्कार “भाव नमस्कार” है
जब आचार्य नमस्कार करते हैं उपाध्यायों और साधुओं को.
“व्यवहार” में नहीं करते.

“व्यवहार” में तो बड़े को प्रणाम छोटे ही करते हैं.

 

तो फिर जैन धर्म में बड़े छोटों को “मन” में भी नमस्कार क्यों करते हैं?

कारण साफ़ है.

जैन धर्म में गुणों की महत्ता है.
जिसने “गुण” धारण किये हैं,
वो नमस्कार के योग्य है.

यदि “व्यवहार” में भी बड़े छोटों को नमस्कार करने लगें, तो फिर “आशीर्वाद” कौन देगा?

एक अन्य पोस्ट में आपने पढ़ा होगा कि स्वयं तीर्थंकर साधू, साध्वी, श्रावक और श्राविका की “स्थापना” तीर्थ के रूप में करते हैं और फिर स्वयं भी उन्हें “नमो तित्थस्स” कह कर नमस्कार करते हैं.

 

है किसी धर्म में ऐसी व्यवस्था जहाँ भगवान स्वयं अपने “भक्तों” को “नमस्कार” करते हों!

“प्रधानम् सर्व धर्माणाम्” ऐसे ही थोड़े कहा जाता हैं : जैन धर्म को!

प्रश्न :

ऊपर आपने पढ़ा कि “नवकार” में बड़े छोटों को “व्यवहार” में नमस्कार नहीं करते. 

क्या आप समझते हैं कि “व्यवहार” में तीर्थंकर जब हमें नमस्कार करते हैं तो हम उसके लायक हैं?
(उत्तर देने की कोशिश करना, चिन्तन-मनन और आपस में चर्चा तब तक करना जब तक “मन” को “संतोष” देने वाला उत्तर ना मिले, फिर भी शंका हो तो जरूर लिखें).