श्री हेमचन्द्राचार्य और “सरस्वती मंत्र”

“कलिकालसर्वज्ञ” श्री हेमचन्द्राचार्य ने माँ सरस्वती के साक्षात दर्शन
“मार्कण्डुश्वर” (गाँव् अजारी, सिरोही, राजस्थान) में
एक ही रात्रि की साधना से पाया.

कुल 84 वर्ष की उम्र में उत्कृष्ट संयम जीवन जीते हुए
साढ़े तीन करोड़ श्लोक लिखे और

“कुमारपाल राजा” को भी बार बार प्रतिबोध दिया
और अंततः उसे जैन धर्म में स्थिर किया.

 

जिस प्रकार एक “स्त्री” “बच्चे” को जन्म देते ही उसी समय “माँ” बन जाती है,

उसी प्रकार माँ सरस्वती भी एक ही दिन में हेमचन्द्राचार्य जैसे “सपूत” को “वरदान” देकर
स्वयं “धन्य” हो गयी.

एक माँ अपने बेटे का चेहरा देखकर ही धन्य हो जाती है
और फिर बड़ा होकर वो विद्वान बने तो फिर कहना ही क्या?

यद्यपि माँ अपने बेटे की प्रशंसा में वो “शब्द” नहीं निकाल पाती

फिर भी “जैसा” वो “बताना” चाहती है, “वैसा” तो बता ही देती है.

माँ सरस्वती के इस अतिप्रभावक मंत्र की “रचना” उन्होंने की है.

 

“ॐ अर्हन्मुखकमलनिवासिनि ….(( फोटो देखें ))”

मंत्र जप विधि:

1. माँ सरस्वती की एक तस्वीर
(मूर्ति हो तो ज्यादा अच्छा क्योंकि उस पर ध्यान जल्दी लगता है – छोटी भी हो तो काफी हो बस मुखाकृति “अच्छी” होनी चाहिए)

2. “स्फटिक” की माला (सफ़ेद रत्न – जो ५०० से १२५० रुपये की मिलती है) वो भी खरीद लें.
(जीवन भर काम आएगी)

3. मूर्ति के आगे दीपक और धूप  करें. (धूप  अत्यंत खुशबूदार होना चाहिए – देवता तभी आकर्षित होते हैं – सिर्फ आप ही सुगन्धि के “शौक़ीन” नहीं हैं 🙂

4. रोज सूर्योदय से आधा घंटे या इससे भी पहले (पर बाद में नहीं) “सुगन्धित वासक्षेप” लेकर ७ बार मूर्ति और यन्त्र पर “पूजन” करें.

 

5. फिर रोज 5 माला मंत्र की गिनें.
(मंत्र को जो फोटो दिया है, उसे “डाउनलोड” कर लें या फोटोग्राफर को इ-मेल करके फोटो ही खिंचवा लें क्योंकि यही मंत्र जप सिद्धि से रोज काम आने वाली आपकी ही “प्रॉपर्टी” बनेगी).

6. ध्यान रखें: पहले ही दिन से ५ माला गुणने  की कोशिश ना करें. मंत्र-जप बीच में छोड़ देने की पूरी सम्भावना है.
1-5  दिन: 21 बार ही गुणे – बड़ी प्रसन्नता और आराम से
6-11 दिन : 54 बार गुणे
12-21 दिन : 108 बार (एक माला गुणें)
21 दिन के बाद : 2 माला गुणें
आप अनुभव करेंगे कि अब मंत्र गुणने में आप कि “स्पीड” बहुत बढ़ गयी है.
43वे दिन से आप 5 माला गुणना  चालू करें.

5 वर्ष में आपको वो ज्ञान हो जाएगा जो आप अभी “सोच” भी नहीं सकते.

पहला और अंतिम प्रश्न :
क्या आप वास्तव में  “ज्ञान “प्राप्त करना चाहते हैं?

मंत्र हस्तलिपि: सुरेन्द्र कुमार राखेचा