श्री बप्पभट्ट सूरी: सरस्वती को भी लज्जित होना पड़ा

श्री बप्पभट्ट सूरी :

गुरु द्वारा दिए गए मंत्र जप में इतने लीन हो गए कि

स्वयं सरस्वती   उसी दिन ब्रह्म वेला में आकाश में घूमती हुई

“मंत्र” से आकर्षित हुई

और उत्तरीय धारण किये हुए बिना ही प्रकट हो गयी.

८ वर्षीय बाल मुनि ने सरस्वती के उप-वस्त्र ना देखकर
मुँह फेर लिया.

 

सरस्वती ने कारण पुछा कि
“वत्स, तुम मुँह क्यों फेर रहे हो?

मुनि ने उत्तर दिया:
“आप अपनी ओर देखो.”

सरस्वती अपनी अवस्था पर लज्जित हुई
पर साथ ही बालमुनि के व्यावहारिक ज्ञान पर
अति प्रसन्न भी हुई.

 

माता सरस्वती के साक्षात दर्शन के कारण अद्वितीय विद्या प्राप्त की.

एक सिक्के को ऊपर उछाल कर नीचे गिरने में जितना समय लगता है,

उतने समय में श्री बप्पभट्टी सूरी 6 श्लोक की रचना कर लेते.

परन्तु उनके ऊँचे ज्ञान को श्रावक तो क्या, साधू भी नहीं समझ सके.

वापस माता को याद करके कहा :

“मेरा ऐसा ज्ञान क्या काम का जिसे कोई समझ ही नहीं पाये.”

माँ सरस्वती ने उन्हें जो उपाय बताया

वो कोई स्वप्न में भी नहीं सोच पायेगा.

 

माँ सरस्वती ने उपाय बताया:
शाम के समय कुछ दिन “दही” का सेवन

तब तक करना जब तक “जुकाम” ना रहने लगे.

इससे तुम्हारी बुद्धि कुछ जड़ हो जाएगी और

इस कारण तुम्हारी बात लोगों को समझ आने लगेगी. 🙂

अपने जीवन काल में श्री बप्पभट्टसूरी ने कई उत्कृष्ट रचनाएं कीं
और आम राजा को प्रतिबोध दिया.

 

फोटो:

आराध्य देवी “सरस्वती”
(white radium में)