मंगलाणं च सव्वेसिं

0
677

नवकार मंत्र का पहला शब्द है नमो.
“नमो” मतलब “नमस्कार”
“नमस्कार” का अर्थ है : “आदर से झुकना”
पर “झुकना” किसलिए?
प्रश्न:
महापुरुषों के सामने मात्र “झुकने” से क्या “कुछ” प्राप्त होगा?
उत्तर:
“पूरे मन” से “झुक” कर स्वयं ही देख लें.
मात्र “तर्क” हर जगह काम नहीं करते.
जो बात तीर्थंकरों ने कही है, उसे एक बार कर के देख लें.

 

नवकार में ही “पर्युषण पर्व” का रहस्य छिपा हुआ है.
“किये हुवे पापों को धोने के लिए” पहले “मैल” कहाँ पर जमा है
ये “देखना” होता है.
यदि खुद की दृष्टि वहां पर ना पड़े, तो गुरु से पूछें.

प्रश्न:
ये तो बड़ी मुसीबत है! “पाप” तो रोज कई बार अनायास ही हो जाते हैं.
उत्तर:
इसीलिए तो “रोज” प्रतिक्रमण करने की बात कही गयी है जैन धर्म में.
पर हमें इसकी परवाह कहाँ है?
किये हुवे पापों को रोज धोना अच्छा रहेगा या साल में एक बार ही धोना अच्छा रहेगा?

 

सही उत्तर अब आपके सामने है कि हमें करना क्या है.

“पर्युषण” पर्व है : किये हुवे पापों का प्रायश्चित करना.
“प्रायश्चित” “ऊपर” से दिखे वैसा करना या स्वयं को “अंदर” से लगे वैसा करना?

“राजनेताओं” के सामने हम “मन” से “झुकते हैं या “दिखाने” के लिए झुकते हैं?
“अफसरों” के सामने हम “मन” से “झुकते हैं या “दिखाने” के लिए झुकते हैं?

बात ये है कि हमें “कहीं ना कहीं” रोज “झुकना” तो पड़ता ही है.
कुछ लोग ऊपर से “एक्टिंग” अच्छी कर लेते हैं. वे राजनेताओं और अफसरों को “खुश” कर लेते हैं.

 

क्या ऐसा “झुकना” धर्म है?
क्या इससे हमारा “मंगल” होगा?

जैन धर्म “व्यवहार” में किसी “दुष्ट” के आगे झुकने से भी मना नहीं करता.
मुग़लों के शासन के समय सेठों को “मस्जिद” में भी पैसे लगाने पड़े हैं.
क्या उन्होंने ये पैसे “मन” से लगाए थे?
उत्तर है: नवाबों को खुश करने के लिए लगाए थे!

क्या उससे उनका मंगल हुआ?
उत्तर हैं : हां, व्यवहार के कारण वो अपना “धर्म” भी अच्छी तरह पाल पाये.
एक समय था जब “पालिताना” में भगवान आदिनाथ के दर्शन करने के लिए टैक्स लगाया जाता था.
सेठों ने अपने “प्रभाव” से (पैसे से) एक साथ पूरा टैक्स भरकर पूरी जनता को आने वाले समय में किसी को भी टैक्स ना भरना पड़े, ऐसी व्यवस्था की.

 

ये काम हुआ “मंगल” का.
खुद से ही प्रश्न करें कि हमने आज तक कौनसा ऐसा काम किया जिसकी लोग अनुमोदना कर सकें
और अपने “मन” को ये लगे कि “जीवन” सफल हो गया है.

विशेष: “क्षमापना” है “भूलों” के प्रति सावधान!
आज ही कोई भूल हुई है उसे आज ही सुधारना अच्छा है या एक साल बाद?

और जानकारी के लिए jainmantras.com द्वारा पब्लिश होने वाली पुस्तक पढ़ें:
“जैनों कि समृद्धि के रहस्य” जो 2016 के अंत तक रिलीज़ होगी.