श्री उवसग्गहरं महाप्रभाविक स्तोत्र – अर्थ एवं प्रभाव : भाग -2

श्री उवसग्गहरं महाप्रभाविक स्तोत्र – अर्थ एवं प्रभाव : भाग -2

उवसग्गहरं पासं पासं वंदामि कम्म घण मुक्कं |
विसहर विस निन्नासं, मंगल कल्लाण आवासं || १ ||

विसहर फुलिंग मन्तं, कण्ठे धारेई जो सया मणुओ
तस्स गह रोग मारी दुट्ठजरा जन्ति उवसामं || २ ||

चिट्ठउ दूरे मंतो, तुज्झ  पणामो  वि बहुफलो होइ
नरतिरि ए सुवि जीवा, पावंति न दुक्ख दोगच्चं || ३ ||

तुह सम्मत्ते लद्धे, चिंतामणि कप्प पायवब्भहिए |
पावंति अविग्घेणं, जीवा अयरा मरं ठाणम् || ४ ||

इअ संथुओ  महायस, भत्तिभर निब्भरेण हियएण |
ता देव! दिज्ज बोहिं, भवे भवे पास जिण चंद || ५ ||

 

उपसर्ग :

1. दैवी कृत,

2. मनुष्य कृत और

3. तिर्यंच कृत होता है.

जिसे अपने अशुभ कर्म के कारण हठीली बिमारी हो,

वो उपसर्ग नहीं है.

१. “ऊपर” (किसी ने “कर दिया”) की परेशानी – दैवी कृत  उपसर्ग है.
२. “झूठा कोर्ट केस”  –  मनुष्य कृत उपसर्ग है.
३. जानवरों का उपद्रव तिर्यंच कृत उपसर्ग है.

ये  उपसर्ग  उवसग्गहरं की पहली गाथा गुणने से ही दूर हो जाते हैं.

 

पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में
बड़े ही भावपूर्वक
सिर्फ २७ बार रोज पहली गाथा गुनें.

फिर घर आकर :

१. एक चांदी या ताम्बे की गिलास में “ताजा” छना  हुआ  पानी भरें.
(उकाला हुआ नहीं)

२. पार्श्वनाथ भगवान की फोटो या मूर्ति के सामने “अगरबत्ती और दीपक” जलाएं.

३. फिर पानी भरी गिलास फोटो के सामने रखें.

४. अब पहले भगवान को हाथ जोड़ें.

५. मन में धरणेन्द्र और पद्मावती को नमस्कार करें.
(भगवान की फोटो में सर के ऊपर “पद्मावती माता” का फ़ण  होता है).

६. अपने गुरु को याद करके नमस्कार करें.

७. जिससे मंत्र सीखा है, उसे याद करके नमस्कार करें.

 

८. मन में ये भाव रखें कि इन सब का “आशीर्वाद” आपको प्राप्त हो गया है.

९. अब बड़ी श्रद्धा से और आनंदपूर्वक एकदम आराम से –

१०. सत्ताईस बार ऊपर वाला गाथा मंत्र गिने.

११. जाप पूरा होने पर पानी उसको पिला दें जिसे कष्ट है.
यदि पूरे घर में कुछ ना कुछ अलग अलग प्रकार के कष्ट हैं,
तो सबको थोड़ा थोड़ा पानी पिला दें.

२७ दिन के अंदर जटिल से जटिल सब बाधाएं दूर हो जाएंगी.
फोटो:

श्री उवसग्गहरं पार्श्वनाथ भगवान
नगपुरा    (म.प.)