“अत्यंत पुण्य” प्रकट करने वाला मंत्र

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“अत्यंत पुण्य” प्रकट करने वाला मंत्र

जिन्हें आज तक जीवन में कुछ भी “प्राप्त” नहीं होने की शिकायत है
उनके लिए Special Treatment

जिन्हें अभी और भी “प्राप्त” करना है,
उनके लिए “Extra Bonus”

जिन्हें मुक्त होना है :
उनके लिए है Life Time Achievement !

एकदम छोटा सा सूत्र और प्रभाव …
(नहीं कह सकते, इतना है)

“नरकायु” को भी “शांत” करने वाला

भावार्थ :

स्वर्ग, पाताल और तिर्यंच लोक में जो कोई भी नाम के तीर्थ (प्रसिद्ध) हैं,
और उनमें जो प्रतिमाएं हैं,
उन सभी को मैं वंदन करता/करती हूँ.

तीर्थ स्थान:
श्री शत्रुंजय, गिरनार, तरंग, शंखेश्वर, कुम्भारिया, आबू, रणकपुर, केसरियाजी, बामनवाड़ा, मांडवगढ़, अंतरिक्ष, मक्षी, हस्तिनापुर, सम्मेतशिखर, राजगृही, काकांदी, क्षत्रियकुंड, पावापुरी, चम्पापुरी, सेरिस, कुलपाक, फळोधी, स्तंभन (कच्छ), अजाहरा, भोयानी, वरकाणा, पानसर, शेरिसा, वामज, मातर, जीरावला, कापरड़ा जी, सहस्त्रफ़णा, गौड़ीजी ….अनेक !

तीनों लोक में :
8 करोड़ से भी अधिक शाश्वत तीर्थ हैं
और 15 अरब से भी अधिक प्रतिमाएं हैं.

इन सभी तीर्थ और प्रतिमाओं जी को “नमस्कार”
“जं किंचि” सूत्र (मंत्र)
मात्र एक बार पढ़ने से हो जाता है.

अहो ! मेरा जिनशासन महान है !

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